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रांची में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक हुई.झारखंड विधानसभा के सभागार में आज राष्ट्रमंडल संसदीय संघ झारखंड शाखा की वार्षिक आम बैठक हुई…भाजपा द्वारा मतदाता सूची से नाम कटवाने की साजिश पर कांग्रेस की आपत्ति-एसआईआरभाजपा प्रदेश कार्यालय में नव नियुक्त प्रदेश पदाधिकारियों की हुई बैठकझारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन असम में मां कामाख्या के पावन धाम में आज पूजा-अर्चना कर सभी के सुख, समृद्धि, शांति, उत्तम स्वास्थ्य, उन्नति और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।-चंपई सोरेन,पूर्व मुख्यमंत्रीअसम विधानसभा चुनाव में षड्यंत्रों से तीर-धनुष की ताकत रोका जा रहा हैभाजपा में समर्पित कार्यकर्ता हाशिए पर, आयातित चेहरे हावी , विनोद कुमार पांडेयसीएम हेमंत ने फोन से असम में दिया भाषण,असम के चाबुआ विधानसभा के मेरे भाइयों-बहनों से मिलने से भी मुझे रोका गया,आज भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर, अपने निवास स्थान पर पार्टी का झंडा लहराकर नमन किया।रांची में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक हुई.झारखंड विधानसभा के सभागार में आज राष्ट्रमंडल संसदीय संघ झारखंड शाखा की वार्षिक आम बैठक हुई…भाजपा द्वारा मतदाता सूची से नाम कटवाने की साजिश पर कांग्रेस की आपत्ति-एसआईआरभाजपा प्रदेश कार्यालय में नव नियुक्त प्रदेश पदाधिकारियों की हुई बैठकझारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन असम में मां कामाख्या के पावन धाम में आज पूजा-अर्चना कर सभी के सुख, समृद्धि, शांति, उत्तम स्वास्थ्य, उन्नति और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।-चंपई सोरेन,पूर्व मुख्यमंत्रीअसम विधानसभा चुनाव में षड्यंत्रों से तीर-धनुष की ताकत रोका जा रहा हैभाजपा में समर्पित कार्यकर्ता हाशिए पर, आयातित चेहरे हावी , विनोद कुमार पांडेयसीएम हेमंत ने फोन से असम में दिया भाषण,असम के चाबुआ विधानसभा के मेरे भाइयों-बहनों से मिलने से भी मुझे रोका गया,आज भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर, अपने निवास स्थान पर पार्टी का झंडा लहराकर नमन किया।
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सीएम हेमंत ने फोन से असम में दिया भाषण, बोले– मुझे जनसभा में जाने से रोका असम के चाबुआ विधानसभा के मेरे भाइयों-बहनों से मिलने से भी मुझे रोका गया, लेकिन विरोधियों का ऐसा षड्यंत्र कभी कामयाब नहीं होगा।

सत्ता के घमंड में चूर होकर लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है, ताकि सच्चाई जनता तक न पहुंचे। प्रचार रोकना, रास्ता रोकना, यही इनकी कुनीति है।

लेकिन हमारा संघर्ष झुकने वाला नहीं है, रुकने वाला नहीं है।

यह लड़ाई सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि सम्मान, अधिकार और अस्तित्व की लड़ाई है। असम के आदिवासी समुदाय को एसटी का अधिकार न देना, कुछ और नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय अन्याय है। चाय बागान के श्रमिकों को ₹500 न्यूनतम मजदूरी मिलना उनका हक है, और यह हक हम लेकर रहेंगे। आदिवासी समाज को उनका अधिकार दिलाकर रहेंगे।

आप सभी से अपील है कि सब एकजुट हो जाइए, क्योंकि आपकी एकजुटता ही वर्षों से आपका शोषण करने वालों की सबसे बड़ी हार बनेगी।

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